BNS 69: बलात्कार (Rape) कानून – पूरी जानकारी हिंदी में

Bns 69

1. प्रस्तावना (bns 69)

भारत में बलात्कार (Rape) जैसे अपराध को सबसे गंभीर और जघन्य अपराधों में गिना जाता है। यह न केवल किसी महिला की गरिमा और स्वतंत्रता का हनन है, बल्कि समाज की नैतिक संरचना पर भी सीधा आघात करता है। भारतीय दंड संहिता (IPC), 1860 में इस अपराध को धारा 375 और 376 के अंतर्गत परिभाषित और दंडित किया गया था। लेकिन वर्ष 2023 में संसद ने Bharatiya Nyaya Sanhita (BNS), 2023 पारित की, जिसके अंतर्गत पुराने IPC को समाप्त कर दिया गया और नये प्रावधान लागू किए गए।

BNS में धारा 69 के अंतर्गत बलात्कार को परिभाषित किया गया है। यह प्रावधान आधुनिक दृष्टिकोण के साथ-साथ पूर्व के कानूनों के सार को भी समाहित करता है। धारा 69 यह स्पष्ट करती है कि यदि कोई पुरुष महिला की इच्छा के विरुद्ध, उसकी सहमति के बिना या भ्रामक सहमति प्राप्त कर उसके साथ यौन संबंध बनाता है, तो वह बलात्कार का दोषी होगा।

2. Bns 69 की परिभाषा

BNS धारा 69 के अनुसार, यदि कोई पुरुष—

किसी महिला की इच्छा के विरुद्ध,

उसकी सहमति के बिना,

उसकी सहमति को धोखे या दबाव से प्राप्त कर,

या ऐसी स्थिति में जब महिला सहमति देने योग्य अवस्था में न हो (जैसे बेहोशी, नशा, मानसिक अक्षमता),
यौन संबंध स्थापित करता है, तो यह बलात्कार कहलाएगा।

यहाँ मुख्य बिंदु यह है कि सहमति (Consent) स्वतंत्र, स्वेच्छा से और बिना किसी दबाव के होनी चाहिए

3. बलात्कार की परिस्थितियाँ

धारा 69 कुछ विशेष परिस्थितियाँ बताती है, जिनमें यदि यौन संबंध बनाए जाते हैं तो वे स्वतः बलात्कार की श्रेणी में आएंगे—

  1. इच्छा के विरुद्ध (Against Will): जब महिला स्पष्ट रूप से मना करे और फिर भी यौन संबंध बनाए जाएँ।
  2. बिना सहमति (Without Consent): जब महिला से सहमति न ली गई हो।
  3. भ्रामक सहमति (Misconception of Fact): जब महिला को धोखे में रखकर सहमति ली जाए। उदाहरण – झूठा विवाह का वादा।
  4. नाबालिग से यौन संबंध: 18 वर्ष से कम आयु की महिला की सहमति कानूनी सहमति नहीं मानी जाएगी।
  5. अक्षम अवस्था में: यदि महिला बेहोश हो, नशे में हो या मानसिक रूप से सहमति देने की स्थिति में न हो।
  6. दबाव, धमकी या भय: यदि डर या दबाव के कारण सहमति ली गई हो।

Bns 69

4. सहमति (Consent) की भूमिका

भारतीय न्यायालयों ने कई बार कहा है कि “सहमति ही बलात्कार के मामलों का निर्धारण करती है।

“सहमति स्वेच्छा से होनी चाहिए।

यदि सहमति डर, धमकी, धोखा या दबाव में दी गई है, तो वह वैध नहीं मानी जाएगी।

नाबालिग की सहमति मान्य नहीं है।

👉 सुप्रीम कोर्ट ने State of H.P. vs. Mango Ram (2000) में कहा कि “सहमति का अर्थ है – सक्रिय और स्वतंत्र भागीदारी।”

5. कानूनी सजा और प्रावधान (Punishment)

धारा 69 में बलात्कार के लिए कठोर दंड का प्रावधान है।

सामान्य बलात्कार (Simple Rape):

न्यूनतम सजा – 10 वर्ष का कठोर कारावास।

अधिकतम सजा – आजीवन कारावास।

साथ ही जुर्माना।

विशेष परिस्थितियाँ (Aggravated Rape):
यदि अपराध—

पुलिसकर्मी, सेना, जेल कर्मी या सरकारी पद पर आसीन व्यक्ति द्वारा हो,

गर्भवती महिला, विकलांग महिला या नाबालिग के साथ हो,

सामूहिक बलात्कार (Gang Rape) हो,
तो सजा आजीवन कारावास या मृत्युदंड तक हो सकती है।

Rape

6. IPC 376 और BNS 69 का तुलनात्मक अध्ययन

परिभाषा बलात्कार की परिभाषा धारा 375 में, सजा 376 में एकीकृत रूप से धारा 69 में
न्यूनतम सजा 7 वर्ष 10 वर्ष
अधिकतम सजा आजीवन कारावास/मृत्युदंड (कुछ मामलों में) आजीवन कारावास/मृत्युदंड
भाषा औपनिवेशिक ढांचा सरल और आधुनिक भाषा

👉 यानी BNS में सजा और अधिक कठोर कर दी गई है।

7. महत्वपूर्ण न्यायिक दृष्टांत (Case Laws)

Tukaram vs. State of Maharashtra (1979) – Mathura Rape Case

बलात्कार से जुड़े कई अहम फैसले भारतीय न्यायपालिका ने दिए हैं—

इसमें सहमति की परिभाषा पर बड़ा विवाद हुआ।

बाद में कानून में संशोधन कर सहमति को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया।

State of Punjab vs. Gurmit Singh (1996)

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पीड़िता के बयान को संदेह की नजर से नहीं देखा जाना चाहिए।

8. फ़र्ज़ी केस और न्यायिक चुनौतियाँ

बलात्कार जैसे मामलों में कई बार झूठे आरोप भी लगाए जाते हैं।

झूठे विवाह वादे पर यौन संबंध बनाने के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं।

अदालतों को यह देखना पड़ता है कि क्या वास्तव में यह धोखा था या सहमति से संबंध थे।

इस कारण कई बार निर्दोष व्यक्ति भी वर्षों तक मुकदमे में फंसा रहता है।

👉 इसलिए अदालतें अब “सहमति और धोखा” के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रही हैं।

9. समाज पर प्रभाव और रोकथाम के उपाय

बलात्कार की घटनाएँ केवल पीड़िता को ही नहीं बल्कि पूरे समाज को झकझोर देती हैं।महिलाओं में भय और असुरक्षा की भावना।परिवार और समाज पर मानसिक आघात।न्यायिक प्रक्रिया लंबी होने से पीड़िता का संघर्ष बढ़ जाता है।रोकथाम के उपाय:महिलाओं को आत्मरक्षा प्रशिक्षण।समाज में लैंगिक समानता की शिक्षा।तेज़ और सख्त न्यायिक प्रक्रिया।पुलिस और प्रशासन की जवाबदेही बढ़ाना।

10. निष्कर्ष

BNS धारा 69 भारतीय समाज में महिलाओं की सुरक्षा को प्राथमिकता देने वाला प्रावधान है। यह न केवल अपराध की परिभाषा को और स्पष्ट करता है, बल्कि कठोर दंड देकर यह संदेश भी देता है कि बलात्कार जैसे अपराध बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे।

हालाँकि, झूठे मुकदमों और गलत इस्तेमाल की आशंका भी बनी रहती है। इसलिए अदालतों को हर मामले में संतुलित दृष्टिकोण अपनाना होगा, ताकि न तो पीड़िता को न्याय से वंचित होना पड़े और न ही निर्दोष व्यक्ति सजा पाए।

👉 कुल मिलाकर, BNS 69 भारत में महिलाओं की गरिमा, सुरक्षा और स्वतंत्रता की रक्षा करने वाला एक मजबूत कानूनी हथियार है

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